मानवाधिकार आयोग या आतंकवादियो की मौसी !
वैसे तो मुझे बहुत पहले से ही लग रहा था की मानवाधिकार आयोग सिर्फ और सिर्फ आतंकवादियो का पक्ष लेता है। ऐसा कभी नहीं लगा कि ये कभी वास्तव में मानव कल्याण के लिए बना है,लेकिन सच्चाई यही है कि ये अपने नाम के बिलकुल उलट है। पता नहीं क्यों हमारे तथाकथित सेक्युलर नेता और कुछ संस्थाएं सिर्फ आतंकवादियों का ही हीत सोचती है।
आज सुबह जब न्यूज़ में सुना कि मानवाधिकार आयोग तथाकथित आठ आतंकवादियों के फर्जी आरोप लगाने वाले की टीम में शामिल हो गई है तब ये लगा कि ये हमारे देश में हमें ही खोखला कर रही है.
पता नहीं क्यों इनको कश्मीर में मारे गए कश्मीरी पंडित नहीं दिखते,पता नहीं क्यों इनको केरल में आरएसएस के कार्यकर्ताओं की दिल को झकोर देने वाली तस्वीर नही दिखती, पता नहीं क्यों इन्हें मुम्बई हमले में मरे गए बेगुनाह नहीं दिखते,पता नहीं क्यों नक्सलियों के हमले में मरते हमारे सीआइसफ के जवानों के परिवारों के आँसू नहीं दिखते,पता नहीं क्यों उन्हें सिर्फ आतंकवादियों के घर परिवार की फिक्र रहती है,इससे ये प्रतित होता है कि ये सभी एक ही थाली के चाटते बट्टे हैं। पर आ अब ऐसा लग रहा है कि हमें इन सभी आतंकप्रेमी को सबक दिया जाये,इनके खिलाफ आवाज उठाई जाये ताकि उनको भी एहसास हो जाये कि ये देश अब बदल रहा है और आतंक को सहलाने वाला भी उतना ही दोषी है जितने की ये आतंकवादी।
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