नेताओं का रंडी रोना
कुछ दिनों पहले जब सीमा पार हमारे जवानों ने आतंकवादियों को ठोका था,कुछ तथाकथित नेता और बुद्धिजीवी कह रहे थे की साबूत दो,और जब आज भोपाल जेल से भागे आतंकवादियों को भोपाल पुलिस ने ठोंक दिया तो यही लोग कह रहे हैं कि ये फ़ेंक एनकाउंटर था. ये वही लोग हैं जो हमेशा आतंकवादियों का पक्ष लेते है,चाहे वो बटला हाउस एनकाउंटर हो या मुम्बई ब्लास्ट का आरोपी,संसद के हमले का मास्टरमाइंड हो या इसरतजहां,ये हमेशा ही देश विरोधी कार्य कारते हैं.
आज सिर्फ उन्ही आठ आतंकवादियों के समर्थन में न्यूज़ आ रही है कोई कह रहा है वे मासूम थे, कोई कह रहा है उनका अंडरट्रायल चल रहा था,एके कोइ देशद्रोही ओवैसी है,एक झामलाल बुडढा हरामी (दिग्विजय ),
साले ने तो खुद बेटी की उम्र की लड़की से छोड़िये कहाँ जा रहा हूँ. आप को शायद पता नहीं कि जिन आतंकवादियों को मारा गया है वो सभी सिमी से जुड़े थे और डकैटी,बैंक लूटम और हत्या में भी शामिल थे.
लेकिन जब इन्हे मारा गया तो ना जाने कहाँ से ये मासूम हो गये इनका धर्म निकल आया.
हमारे एक और नेता हैं अरविन्द खुजलीवाल इनका तो ऐसा हाल है जैसे इनका कोई सगा हो.
ये सारे देशद्रोही हैं जो सिर्फ वोट बैंक की राजनीति करते हैं.कुछ मुल्ले मौलवी जो कहते हैं कि आतंक का कोई मज़हब नहीं होता उन्हें मासूम बता रहे हैं ,एक कोई भडवा रविश है जो कह रहा है कि उनसे सरेंडर भी करवाया जा सकता था,एक कोई व्यस्या करात है उसे भी अनपच हो गया है.लेकिन अब हम जानते हैं कि कौन आतंक का समर्थक है.
मुझे लगता है कि जो मारे गये हैं उन सभी से इनके रिश्तों की जांच होनी चाहिये।
Comments
Post a Comment